॥ श्रीहरिः ॥
प्रथम स्कन्ध
॥ श्रीगणेशायः नमः॥
श्रीमद्भागवतमहापुराणम्
प्रथमः स्कन्धः
- 1अथ प्रथमोऽध्यायःश्रीसूतजीसे शौनकादि ऋषियोंका प्रश्न23 श्लोक
पृष्ठ 81 - 2अथ द्वितीयोऽध्यायःभगवत्कथा और भगवद्भक्तिका माहात्म्य34 श्लोक
पृष्ठ 84 - 3अथ तृतीयोऽध्यायःभगवान्के अवतारोंका वर्णन45 श्लोक
पृष्ठ 88 - 4अथ चतुर्थोऽध्यायःमहर्षि व्यासका असन्तोष33 श्लोक
पृष्ठ 93 - 5अथ पञ्चमोऽध्यायःभगवान्के यश-कीर्तनकी महिमा और देवर्षि नारदजीका पूर्वचरित्र40 श्लोक
पृष्ठ 97 - 6अथ षष्ठोऽध्यायःनारदजीके पूर्वचरित्रका शेष भाग39 श्लोक
पृष्ठ 102 - 7अथ सप्तमोऽध्यायःअश्वत्थामाद्वारा द्रौपदीके पुत्रोंका मारा जाना और अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाका मानमर्दन58 श्लोक
पृष्ठ 106 - 8अथाष्टमोऽध्यायःगर्भमें परीक्षित्की रक्षा, कुन्तीके द्वारा भगवान्की स्तुति और युधिष्ठिरका शोक52 श्लोक
पृष्ठ 113 - 9अथ नवमोऽध्यायःयुधिष्ठिरादिका भीष्मजीके पास जाना और भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति करते हुए भीष्मजीका प्राणत्याग करना49 श्लोक
पृष्ठ 119 - 10अथ दशमोऽध्यायःश्रीकृष्णका द्वारका-गमन36 श्लोक
पृष्ठ 124 - 11अथैकादशोऽध्यायःद्वारकामें श्रीकृष्णका राजोचित स्वागत39 श्लोक
पृष्ठ 130 - 12अथ द्वादशोऽध्यायःपरीक्षित्का जन्म36 श्लोक
पृष्ठ 135 - 13अथ त्रयोदशोऽध्यायःविदुरजीके उपदेशसे धृतराष्ट्र और गान्धारीका वनमें जाना59 श्लोक
पृष्ठ 139 - 14अथ चतुर्दशोऽध्यायःअपशकुन देखकर महाराज युधिष्ठिरका शंका करना और अर्जुनका द्वारकासे लौटना44 श्लोक
पृष्ठ 146 - 15अथ पञ्चदशोऽध्यायःकृष्णविरहव्यथित पाण्डवोंका परीक्षित्को राज्य देकर स्वर्ग सिधारना51 श्लोक
पृष्ठ 150 - 16अथ षोडशोऽध्यायःपरीक्षित्की दिग्विजय तथा धर्म और पृथ्वीका संवाद36 श्लोक
पृष्ठ 157 - 17अथ सप्तदशोऽध्यायःमहाराज परीक्षित्द्वारा कलियुगका दमन45 श्लोक
पृष्ठ 163 - 18अथाष्टादशोऽध्यायःराजा परीक्षित्को शृंगी ऋषिका शाप50 श्लोक
पृष्ठ 167 - 19अथैकोनविंशोऽध्यायःपरीक्षित्का अनशनव्रत और शुकदेवजीका आगमन40 श्लोक
पृष्ठ 174
॥ ॐ तत्सत्॥