इसी समय भगवान्के दिव्य और सनातन आयुध भी अपने-आप वहाँ आकर उपस्थित हो गये। उन्हें देखकर भगवान् श्रीकृष्णने अपने बड़े भाई बलरामजीसे कहा—॥ १२॥
आयुधानि च दिव्यानि पुराणानि यदृच्छया।
दृष्ट्वा तानि हृषीकेशः संकर्षणमथाब्रवीत्॥ १२
इसी समय भगवान्के दिव्य और सनातन आयुध भी अपने-आप वहाँ आकर उपस्थित हो गये। उन्हें देखकर भगवान् श्रीकृष्णने अपने बड़े भाई बलरामजीसे कहा—॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.50.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 446) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/50/12/