श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.50.31

दशम स्कन्ध · अध्याय 50 · अथ पञ्चाशत्तमोऽध्यायः

जग्राह विरथं रामो जरासन्धं महाबलम्।

हतानीकावशिष्टासुं सिंहः सिंहमिवौजसा॥ ३१

jagrāha virathaṃ rāmo jarāsandhaṃ mahābalam|

hatānīkāvaśiṣṭāsuṃ siṃhaḥ siṃhamivaujasā|| 31

अर्थ

इस प्रकार जरासन्धकी सारी सेना मारी गयी। रथ भी टूट गया। शरीरमें केवल प्राण बाकी रहे। तब भगवान् श्रीबलरामजीने जैसे एक सिंह दूसरे सिंहको पकड़ लेता है, वैसे ही बलपूर्वक महाबली जरासन्धको पकड़ लिया॥ ३१॥

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