श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.50.37

दशम स्कन्ध · अध्याय 50 · अथ पञ्चाशत्तमोऽध्यायः

माथुरैरुपसंगम्य विज्वरैर्मुदितात्मभिः।

उपगीयमानविजयः सूतमागधवन्दिभिः॥ ३७

māthurairupasaṃgamya vijvarairmuditātmabhiḥ|

upagīyamānavijayaḥ sūtamāgadhavandibhiḥ|| 37

अर्थ

जरासन्धकी सेनाके पराजयसे मथुरावासी भयरहित हो गये थे और भगवान् श्रीकृष्णकी विजयसे उनका हृदय आनन्दसे भर रहा था। भगवान् श्रीकृष्ण आकर उनमें मिल गये। सूत, मागध और वन्दीजन उनकी विजयके गीत गा रहे थे॥ ३७॥✎ 1683

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1683 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: मथुरा-वासी → मथुरावासी

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