जरासन्धकी सेनाके पराजयसे मथुरावासी भयरहित हो गये थे और भगवान् श्रीकृष्णकी विजयसे उनका हृदय आनन्दसे भर रहा था। भगवान् श्रीकृष्ण आकर उनमें मिल गये। सूत, मागध और वन्दीजन उनकी विजयके गीत गा रहे थे॥ ३७॥✎ 1683
माथुरैरुपसंगम्य विज्वरैर्मुदितात्मभिः।
उपगीयमानविजयः सूतमागधवन्दिभिः॥ ३७
जरासन्धकी सेनाके पराजयसे मथुरावासी भयरहित हो गये थे और भगवान् श्रीकृष्णकी विजयसे उनका हृदय आनन्दसे भर रहा था। भगवान् श्रीकृष्ण आकर उनमें मिल गये। सूत, मागध और वन्दीजन उनकी विजयके गीत गा रहे थे॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.50.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 449) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/50/37/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)