श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.50.4

दशम स्कन्ध · अध्याय 50 · अथ पञ्चाशत्तमोऽध्यायः

अक्षौहिणीभिर्विंशत्या तिसृभिश्‍चापि संवृतः।

यदुराजधानीं मथुरां न्यरुणत् सर्वतोदिशम्॥ ४

akṣauhiṇībhirviṃśatyā tisṛbhiścāpi saṃvṛtaḥ|

yadurājadhānīṃ mathurāṃ nyaruṇat sarvatodiśam|| 4

अर्थ

और तेईस अक्षौहिणी सेनाके साथ यदुवंशियोंकी राजधानी मथुराको चारों ओरसे घेर लिया॥ ४॥

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