श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.50.40

दशम स्कन्ध · अध्याय 50 · अथ पञ्चाशत्तमोऽध्यायः

निचीयमानो१ नारीभिर्माल्यदध्यक्षतांकुरैः।

निरीक्ष्यमाणः सस्नेहं प्रीत्युत्कलितलोचनैः॥ ४०

nicīyamāno nārībhirmālyadadhyakṣatāṃkuraiḥ|

nirīkṣyamāṇaḥ sasnehaṃ prītyutkalitalocanaiḥ|| 40

अर्थ

जिस समय श्रीकृष्ण नगरमें प्रवेश कर रहे थे, उस समय नगरकी नारियाँ प्रेम और उत्कण्ठासे भरे हुए नेत्रोंसे उन्हें स्नेहपूर्वक निहार रही थीं और फूलोंके हार, दही, अक्षत और जौ आदिके अंकुरोंकी उनके ऊपर वर्षा कर रही थीं॥ ४०॥✎ 1683

टिप्पणियाँ

  1. १

    विकीर्यमाणो।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 450)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1683 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: मथुरा-वासी → मथुरावासी

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