वरुणजीने ऐसे बहुत-से श्वेत घोड़े भेज दिये, जिनका एक-एक कान श्यामवर्णका था और जिनकी चाल मनके समान तेज थी। धनपति कुबेरजीने अपनी आठों निधियाँ भेज दीं और दूसरे लोकपालोंने भी अपनी-अपनी विभूतियाँ भगवान्के पास भेज दीं॥ ५६॥
श्यामैककर्णान् वरुणो हयाञ्छुक्लान् मनोजवान्।
अष्टौ निधिपतिः कोशान् लोकपालो निजोदयान्॥ ५६
वरुणजीने ऐसे बहुत-से श्वेत घोड़े भेज दिये, जिनका एक-एक कान श्यामवर्णका था और जिनकी चाल मनके समान तेज थी। धनपति कुबेरजीने अपनी आठों निधियाँ भेज दीं और दूसरे लोकपालोंने भी अपनी-अपनी विभूतियाँ भगवान्के पास भेज दीं॥ ५६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.50.56 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 452) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/50/56/