श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.50.9

दशम स्कन्ध · अध्याय 50 · अथ पञ्चाशत्तमोऽध्यायः

एतदर्थोऽवतारोऽयं भूभारहरणाय मे।

संरक्षणाय साधूनां कृतोऽन्येषां वधाय च॥ ९

etadartho'vatāro'yaṃ bhūbhāraharaṇāya me|

saṃrakṣaṇāya sādhūnāṃ kṛto'nyeṣāṃ vadhāya ca|| 9

अर्थ

मेरे अवतारका यही प्रयोजन है कि मैं पृथ्वीका बोझ हलका कर दूँ, साधु-सज्जनोंकी रक्षा करूँ और दुष्ट-दुर्जनोंका संहार॥ ९॥✎ 1682

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1682 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: मगध-राज → मगधराज

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