श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.51.38

दशम स्कन्ध · अध्याय 51 · अथैकपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

क्वचिद् रजांसि विममे पार्थिवान्युरुजन्मभिः।

गुणकर्माभिधानानि न मे जन्मानि कर्हिचित्॥ ३८

kvacid rajāṃsi vimame pārthivānyurujanmabhiḥ|

guṇakarmābhidhānāni na me janmāni karhicit|| 38

अर्थ

यह सम्भव है कि कोई पुरुष अपने अनेक जन्मोंमें पृथ्वीके छोटे-छोटे धूल-कणोंकी गिनती कर डाले; परन्तु मेरे जन्म, गुण, कर्म और नामोंको कोई कभी किसी प्रकार नहीं गिन सकता॥ ३८॥

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