श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.51.40

दशम स्कन्ध · अध्याय 51 · अथैकपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

तथाप्यद्यतनान्यंग शृणुष्व गदतो मम।

विज्ञापितो विरिञ्चेन पुराहं धर्मगुप्तये।

भूमेर्भारायमाणानामसुराणां क्षयाय च॥ ४०

tathāpyadyatanānyaṃga śṛṇuṣva gadato mama|

vijñāpito viriñcena purāhaṃ dharmaguptaye|

bhūmerbhārāyamāṇānāmasurāṇāṃ kṣayāya ca|| 40

अर्थ

प्रिय मुचुकुन्द! ऐसा होनेपर भी मैं अपने वर्तमान जन्म, कर्म और नामोंका वर्णन करता हूँ, सुनो। पहले ब्रह्माजीने मुझसे धर्मकी रक्षा और पृथ्वीके भार बने हुए असुरोंका संहार करनेके लिये प्रार्थना की थी॥ ४०॥

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