॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.51.60
प्रलोभितो वरैर्यत्त्वमप्रमादाय विद्धि तत्।
न धीर्मय्येकभक्तानामाशीर्भिर्भिद्यते क्वचित्॥ ६०
pralobhito varairyattvamapramādāya viddhi tat|
na dhīrmayyekabhaktānāmāśīrbhirbhidyate kvacit|| 60
अर्थ
मैंने तुम्हें जो वर देनेका प्रलोभन दिया, वह केवल तुम्हारी सावधानीकी परीक्षाके लिये। मेरे जो अनन्य भक्त होते हैं, उनकी बुद्धि कभी कामनाओंसे इधर-उधर नहीं भटकती॥ ६०॥