जरासन्धने झूठमूठ ऐसा मान लिया कि श्रीकृष्ण और बलराम तो जल गये और फिर वह अपनी बहुत बड़ी सेना लौटाकर मगधदेशको चला गया॥ १४॥✎ 1685
सोऽपि दग्धाविति मृषा मन्वानो बलकेशवौ।
बलमाकृष्य सुमहन्मगधान् मागधो ययौ॥ १४
जरासन्धने झूठमूठ ऐसा मान लिया कि श्रीकृष्ण और बलराम तो जल गये और फिर वह अपनी बहुत बड़ी सेना लौटाकर मगधदेशको चला गया॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.52.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 462) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/52/14/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)