श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.52.23

दशम स्कन्ध · अध्याय 52 · अथ द्विपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

सोपश्रुत्य मुकुन्दस्य रूपवीर्यगुणश्रियः।

गृहागतैर्गीयमानास्तं मेने सदृशं पतिम्॥ २३

sopaśrutya mukundasya rūpavīryaguṇaśriyaḥ|

gṛhāgatairgīyamānāstaṃ mene sadṛśaṃ patim|| 23

अर्थ

जब उसने भगवान् श्रीकृष्णके सौन्दर्य, पराक्रम, गुण और वैभवकी प्रशंसा सुनी—जो उसके महलमें आनेवाले अतिथि प्रायः गाया ही करते थे—तब उसने यही निश्‍चय किया कि भगवान् श्रीकृष्ण ही मेरे अनुरूप पति हैं॥ २३॥

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