॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.53.21
बलेन महता सार्धं भ्रातृस्नेहपरिप्लुतः।
त्वरितः कुण्डिनं प्रागाद् गजाश्वरथपत्तिभिः॥ २१
balena mahatā sārdhaṃ bhrātṛsnehapariplutaḥ|
tvaritaḥ kuṇḍinaṃ prāgād gajāśvarathapattibhiḥ|| 21
अर्थ
यद्यपि वे श्रीकृष्णका बल-विक्रम जानते थे, फिर भी भ्रातृस्नेहसे उनका हृदय भर आया; वे तुरंत ही हाथी, घोड़े, रथ और पैदलोंकी बड़ी भारी चतुरंगिणी सेना साथ लेकर कुण्डिनपुरके लिये चल पड़े॥ २१॥