राजा भीष्मकने सुना कि भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजी मेरी कन्याका विवाह देखनेके लिये उत्सुकतावश यहाँ पधारे हैं। तब तुरही, भेरी आदि बाजे बजवाते हुए पूजाकी सामग्री लेकर उन्होंने उनकी अगवानी की॥ ३२॥
प्राप्तौ श्रुत्वा स्वदुहितुरुद्वाहप्रेक्षणोत्सुकौ।
अभ्ययात्तूर्यघोषेण रामकृष्णौ समर्हणैः॥ ३२
राजा भीष्मकने सुना कि भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजी मेरी कन्याका विवाह देखनेके लिये उत्सुकतावश यहाँ पधारे हैं। तब तुरही, भेरी आदि बाजे बजवाते हुए पूजाकी सामग्री लेकर उन्होंने उनकी अगवानी की॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.53.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 470) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/53/32/