भीष्मकजी बड़े बुद्धिमान् थे । भगवान्के प्रति उनकी बड़ी भक्ति थी। उन्होंने भगवान्को सेना और साथियोंके सहित समस्त सामग्रियोंसे युक्त निवासस्थानमें ठहराया और उनका यथावत् आतिथ्य-सत्कार किया॥ ३४॥
तयोर्निवेशनं श्रीमदुपकल्प्य महामतिः।
ससैन्ययोः सानुगयोरातिथ्यं विदधे यथा॥ ३४
भीष्मकजी बड़े बुद्धिमान् थे । भगवान्के प्रति उनकी बड़ी भक्ति थी। उन्होंने भगवान्को सेना और साथियोंके सहित समस्त सामग्रियोंसे युक्त निवासस्थानमें ठहराया और उनका यथावत् आतिथ्य-सत्कार किया॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.53.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 470) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/53/34/