श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.53.36

दशम स्कन्ध · अध्याय 53 · अथ त्रिपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

कृष्णमागतमाकर्ण्य विदर्भपुरवासिनः।

आगत्य नेत्रांजलिभिः पपुस्तन्मुखपंकजम्॥ ३६

kṛṣṇamāgatamākarṇya vidarbhapuravāsinaḥ|

āgatya netrāṃjalibhiḥ papustanmukhapaṃkajam|| 36

अर्थ

विदर्भदेशके नागरिकोंने जब सुना कि भगवान् श्रीकृष्ण यहाँ पधारे हैं, तब वे लोग भगवान्‌के निवासस्थानपर आये और अपने नयनोंकी अंजलिमें भर-भरकर उनके वदनारविन्दका मधुर मकरन्द-रस पान करने लगे॥ ३६॥

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