बहुत-सी विधि-विधान जाननेवाली बड़ी-बूढ़ी ब्राह्मणियाँ उनके साथ थीं। उन्होंने भगवान् शंकरकी अर्द्धांगिनी भवानीको और भगवान् शंकरजीको भी रुक्मिणीजीसे प्रणाम करवाया॥ ४५॥
तां वै प्रवयसो बालां विधिज्ञा विप्रयोषितः।
भवानीं वन्दयांचक्रुर्भवपत्नीं भवान्विताम्॥ ४५
बहुत-सी विधि-विधान जाननेवाली बड़ी-बूढ़ी ब्राह्मणियाँ उनके साथ थीं। उन्होंने भगवान् शंकरकी अर्द्धांगिनी भवानीको और भगवान् शंकरजीको भी रुक्मिणीजीसे प्रणाम करवाया॥ ४५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.53.45 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 471) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/53/45/