श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.54.19

दशम स्कन्ध · अध्याय 54 · अथ चतुःपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

रुक्म्यमर्षी सुसंरब्धः शृण्वतां सर्वभूभुजाम्।

प्रतिजज्ञे महाबाहुर्दंशितः सशरासनः॥ १९

rukmyamarṣī susaṃrabdhaḥ śṛṇvatāṃ sarvabhūbhujām|

pratijajñe mahābāhurdaṃśitaḥ saśarāsanaḥ|| 19

अर्थ

महाबाहु रुक्मी क्रोधके मारे जल रहा था। उसने कवच पहनकर और धनुष धारण करके समस्त नरपतियोंके सामने यह प्रतिज्ञा की—॥ १९॥

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