राजन्! जब यदुवंशियोंके सेनापतियोंने देखा कि शत्रुदल हमपर चढ़ा आ रहा है, तब उन्होंने भी अपने-अपने धनुषका टंकार किया और घूमकर उनके सामने डट गये॥ २॥✎ 16882111
तानापतत आलोक्य यादवानीकयूथपाः।
तस्थुस्तत्संमुखा राजन्विस्फूर्ज्य स्वधनूंषि ते॥ २
राजन्! जब यदुवंशियोंके सेनापतियोंने देखा कि शत्रुदल हमपर चढ़ा आ रहा है, तब उन्होंने भी अपने-अपने धनुषका टंकार किया और घूमकर उनके सामने डट गये॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.54.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 474) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/54/2/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)