श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.54.22

दशम स्कन्ध · अध्याय 54 · अथ चतुःपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

अद्याहं निशितैर्बाणैर्गोपालस्य सुदुर्मतेः।

नेष्ये वीर्यमदं येन स्वसा मे प्रसभं हृता॥ २२

adyāhaṃ niśitairbāṇairgopālasya sudurmateḥ|

neṣye vīryamadaṃ yena svasā me prasabhaṃ hṛtā|| 22

अर्थ

आज मैं अपने तीखे बाणोंसे उस खोटी बुद्धिवाले ग्वालेके बल-वीर्यका घमंड चूर-चूर कर दूँगा। देखो तो उसका साहस, वह हमारी बहिनको बलपूर्वक हर ले गया है’॥ २२॥

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