अन्तमें विजयकी सच्ची आकांक्षावाले यदुवंशियोंने शत्रुओंकी सेना तहस-नहस कर डाली। जरासन्ध आदि सभी राजा युद्धसे पीठ दिखाकर भाग खड़े हुए॥ ९॥✎ 16882111
हन्यमानबलानीका वृष्णिभिर्जयकांक्षिभिः।
राजानो विमुखा जग्मुर्जरासन्धपुरःसराः॥ ९
अन्तमें विजयकी सच्ची आकांक्षावाले यदुवंशियोंने शत्रुओंकी सेना तहस-नहस कर डाली। जरासन्ध आदि सभी राजा युद्धसे पीठ दिखाकर भाग खड़े हुए॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.54.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 474) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/54/9/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)