श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.55.37

दशम स्कन्ध · अध्याय 55 · अथ पञ्चपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

तच्छ्रुत्वा महदाश्‍चर्यं कृष्णान्तःपुरयोषितः।

अभ्यनन्दन् बहूनब्दान् नष्टं मृतमिवागतम्॥ ३७

tacchrutvā mahadāścaryaṃ kṛṣṇāntaḥpurayoṣitaḥ|

abhyanandan bahūnabdān naṣṭaṃ mṛtamivāgatam|| 37

अर्थ

नारदजीके द्वारा यह महान् आश्‍चर्यमयी घटना सुनकर भगवान् श्रीकृष्णके अन्तःपुरकी स्त्रियाँ चकित हो गयीं और बहुत वर्षोंतक खोये रहनेके बाद लौटे हुए प्रद्युम्‍नजीका इस प्रकार अभिनन्दन करने लगीं, मानो कोई मरकर जी उठा हो॥ ३७॥

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