उसी रतिको शम्बरासुरने अपने यहाँ दाल-भात बनानेके काममें नियुक्त कर रखा था। जब उसे मालूम हुआ कि इस शिशुके रूपमें मेरे पति कामदेव ही हैं, तब वह उसके प्रति बहुत प्रेम करने लगी॥ ८॥✎ 2112
निरूपिता शम्बरेण सा सूपौदनसाधने।
कामदेवं शिशुं बुद्ध्वा चक्रे स्नेहं तदार्भके॥ ८
उसी रतिको शम्बरासुरने अपने यहाँ दाल-भात बनानेके काममें नियुक्त कर रखा था। जब उसे मालूम हुआ कि इस शिशुके रूपमें मेरे पति कामदेव ही हैं, तब वह उसके प्रति बहुत प्रेम करने लगी॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.55.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 482) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/55/8/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)