श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.56.19

दशम स्कन्ध · अध्याय 56 · अथ षट्पञ्चाशत्तमोऽध्यायः

ऋक्षराजबिलं भीममन्धेन तमसाऽऽवृतम्।

एको विवेश भगवानवस्थाप्य बहिः प्रजाः॥ १९

ṛkṣarājabilaṃ bhīmamandhena tamasā''vṛtam|

eko viveśa bhagavānavasthāpya bahiḥ prajāḥ|| 19

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णने सब लोगोंको बाहर ही बिठा दिया और अकेले ही घोर अन्धकारसे भरी हुई ऋक्षराजकी भयंकर गुफामें प्रवेश किया॥ १९॥✎ 2114

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #2114 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें