॥ श्रीहरिः ॥
तमपूर्वं नरं दृष्ट्वा धात्री चुक्रोश भीतवत्।
तच्छ्रुत्वाभ्यद्रवत् क्रुद्धो जाम्बवान् बलिनां वरः॥ २१
tamapūrvaṃ naraṃ dṛṣṭvā dhātrī cukrośa bhītavat|
tacchrutvābhyadravat kruddho jāmbavān balināṃ varaḥ|| 21
अर्थ
उस गुफामें एक अपरिचित मनुष्यको देखकर बच्चेकी धाय भयभीतकी भाँति चिल्ला उठी। उसकी चिल्लाहट सुनकर परम बली ऋक्षराज जाम्बवान् क्रोधित होकर वहाँ दौड़ आये॥ २१॥✎ 2114
तमपूर्वं नरं दृष्ट्वा धात्री चुक्रोश भीतवत्।
तच्छ्रुत्वाभ्यद्रवत् क्रुद्धो जाम्बवान् बलिनां वरः॥ २१
उस गुफामें एक अपरिचित मनुष्यको देखकर बच्चेकी धाय भयभीतकी भाँति चिल्ला उठी। उसकी चिल्लाहट सुनकर परम बली ऋक्षराज जाम्बवान् क्रोधित होकर वहाँ दौड़ आये॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.56.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 488) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/56/21/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
- #2114 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि