परीक्षित्! वज्र-प्रहारके समान कठोर घूँसोंसे आपसमें वे अट्ठाईस दिनतक बिना विश्राम किये रात-दिन लड़ते रहे॥ २४॥✎ 2114
आसीत्तदष्टाविंशाहमितरेतरमुष्टिभिः ।
वज्रनिष्पेषपरुषैरविश्रममहर्निशम् ॥ २४
परीक्षित्! वज्र-प्रहारके समान कठोर घूँसोंसे आपसमें वे अट्ठाईस दिनतक बिना विश्राम किये रात-दिन लड़ते रहे॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.56.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 488) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/56/24/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)