॥ श्रीहरिः ॥
नारायण नमस्तेऽस्तु शंखचक्रगदाधर।
दामोदरारविन्दाक्ष गोविन्द यदुनन्दन॥ ६
nārāyaṇa namaste'stu śaṃkhacakragadādhara|
dāmodarāravindākṣa govinda yadunandana|| 6
अर्थ
लोगोंने कहा—‘शंख-चक्र-गदाधारी नारायण! कमलनयन दामोदर! यदुवंशशिरोमणि गोविन्द! आपको नमस्कार है॥ ६॥
नारायण नमस्तेऽस्तु शंखचक्रगदाधर।
दामोदरारविन्दाक्ष गोविन्द यदुनन्दन॥ ६
लोगोंने कहा—‘शंख-चक्र-गदाधारी नारायण! कमलनयन दामोदर! यदुवंशशिरोमणि गोविन्द! आपको नमस्कार है॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.56.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 486) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/56/6/