श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.57.7

दशम स्कन्ध · अध्याय 57 · अथ सप्तपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

सत्यभामा च पितरं हतं वीक्ष्य शुचार्पिता।

व्यलपत्तात तातेति हा हतास्मीति मुह्यती॥ ७

satyabhāmā ca pitaraṃ hataṃ vīkṣya śucārpitā|

vyalapattāta tāteti hā hatāsmīti muhyatī|| 7

अर्थ

सत्यभामाजीको यह देखकर कि मेरे पिता मार डाले गये हैं, बड़ा शोक हुआ और वे ‘हाय पिताजी! हाय पिताजी! मैं मारी गयी’—इस प्रकार पुकार-पुकारकर विलाप करने लगीं। बीच-बीचमें वे बेहोश हो जातीं और होशमें आनेपर फिर विलाप करने लगतीं॥ ७॥

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