सत्यभामाजीको यह देखकर कि मेरे पिता मार डाले गये हैं, बड़ा शोक हुआ और वे ‘हाय पिताजी! हाय पिताजी! मैं मारी गयी’—इस प्रकार पुकार-पुकारकर विलाप करने लगीं। बीच-बीचमें वे बेहोश हो जातीं और होशमें आनेपर फिर विलाप करने लगतीं॥ ७॥
सत्यभामा च पितरं हतं वीक्ष्य शुचार्पिता।
व्यलपत्तात तातेति हा हतास्मीति मुह्यती॥ ७
सत्यभामाजीको यह देखकर कि मेरे पिता मार डाले गये हैं, बड़ा शोक हुआ और वे ‘हाय पिताजी! हाय पिताजी! मैं मारी गयी’—इस प्रकार पुकार-पुकारकर विलाप करने लगीं। बीच-बीचमें वे बेहोश हो जातीं और होशमें आनेपर फिर विलाप करने लगतीं॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.57.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 492) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/57/7/