‘सुन्दरी! तुम कौन हो? किसकी पुत्री हो? कहाँसे आयी हो? और क्या करना चाहती हो? मैं ऐसा समझता हूँ कि तुम अपने योग्य पति चाह रही हो। हे कल्याणि! तुम अपनी सारी बात बतलाओ’॥ १९॥
का त्वं कस्यासि सुश्रोणि कुतोऽसि किं चिकीर्षसि।
मन्ये त्वां पतिमिच्छन्तीं सर्वं कथय शोभने॥ १९
‘सुन्दरी! तुम कौन हो? किसकी पुत्री हो? कहाँसे आयी हो? और क्या करना चाहती हो? मैं ऐसा समझता हूँ कि तुम अपने योग्य पति चाह रही हो। हे कल्याणि! तुम अपनी सारी बात बतलाओ’॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.58.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 498) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/58/19/