श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.58.49

दशम स्कन्ध · अध्याय 58 · अथाष्टपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

शंखभेर्यानका नेदुर्गीतवाद्यद्विजाशिषः।

नरा नार्यः प्रमुदिताः सुवासःस्रगलंकृताः॥ ४९

śaṃkhabheryānakā nedurgītavādyadvijāśiṣaḥ|

narā nāryaḥ pramuditāḥ suvāsaḥsragalaṃkṛtāḥ|| 49

अर्थ

शंख, ढोल, नगारे बजने लगे। सब ओर गाना-बजाना होने लगा। ब्राह्मण आशीर्वाद देने लगे। सुन्दर वस्त्र, पुष्पोंके हार और गहनोंसे सज-धजकर नगरके नर-नारी आनन्द मनाने लगे॥ ४९॥

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