और वे बड़े वेगसे उनपर बाणोंकी वर्षा करने लगे। उस समय पाण्डववीर अर्जुनने अपने मित्र भगवान् श्रीकृष्णका प्रिय करनेके लिये गाण्डीव धनुष धारण करके—जैसे सिंह छोटे-मोटे पशुओंको खदेड़ दे, वैसे ही उन नरपतियोंको मार-पीटकर भगा दिया॥ ५४॥
तानस्यतः शरव्रातान् बन्धुप्रियकृदर्जुनः।
गाण्डीवी कालयामास सिंहः क्षुद्रमृगानिव॥ ५४
और वे बड़े वेगसे उनपर बाणोंकी वर्षा करने लगे। उस समय पाण्डववीर अर्जुनने अपने मित्र भगवान् श्रीकृष्णका प्रिय करनेके लिये गाण्डीव धनुष धारण करके—जैसे सिंह छोटे-मोटे पशुओंको खदेड़ दे, वैसे ही उन नरपतियोंको मार-पीटकर भगा दिया॥ ५४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.58.54 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 502) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/58/54/