॥ श्रीहरिः ॥
अन्याश्चैवंविधा भार्याः कृष्णस्यासन् सहस्रशः।
भौमं हत्वा तन्निरोधादाहृताश्चारुदर्शनाः॥ ५८
anyāścaivaṃvidhā bhāryāḥ kṛṣṇasyāsan sahasraśaḥ|
bhaumaṃ hatvā tannirodhādāhṛtāścārudarśanāḥ|| 58
अर्थ
परीक्षित्! इसी प्रकार भगवान् श्रीकृष्णकी और भी सहस्रों स्त्रियाँ थीं। उन परम सुन्दरियोंको वे भौमासुरको मारकर उसके बंदीगृहसे छुड़ा लाये थे॥ ५८॥
इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां दशमस्कन्धे उत्तरार्धे
अष्टमहिष्युद्वाहो नामाष्टपञ्चाशत्तमोऽध्यायः॥ ५८॥
अन्याश्चैवंविधा भार्याः कृष्णस्यासन् सहस्रशः।
भौमं हत्वा तन्निरोधादाहृताश्चारुदर्शनाः॥ ५८
परीक्षित्! इसी प्रकार भगवान् श्रीकृष्णकी और भी सहस्रों स्त्रियाँ थीं। उन परम सुन्दरियोंको वे भौमासुरको मारकर उसके बंदीगृहसे छुड़ा लाये थे॥ ५८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.58.58 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 503) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/58/58/