श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.59.26

दशम स्कन्ध · अध्याय 59 · अथैकोनषष्टितमोऽध्यायः

नमः पंकजनाभाय नमः पंकजमालिने।

नमः पंकजनेत्राय नमस्ते पंकजाङ्‌घ्र‌ये॥ २६

namaḥ paṃkajanābhāya namaḥ paṃkajamāline|

namaḥ paṃkajanetrāya namaste paṃkajāṅghraye|| 26

अर्थ

प्रभो! आपकी नाभिसे कमल प्रकट हुआ है। आप कमलकी माला पहनते हैं। आपके नेत्र कमलसे खिले हुए और शान्तिदायक हैं। आपके चरण कमलके समान सुकुमार और भक्तोंके हृदयको शीतल करनेवाले हैं। आपको मैं बार-बार नमस्कार करती हूँ॥ २६॥

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