श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.59.39

दशम स्कन्ध · अध्याय 59 · अथैकोनषष्टितमोऽध्यायः

चोदितो भार्ययोत्पाट्य पारिजातं गरुत्मति।

आरोप्य सेन्द्रान् विबुधान् निर्जित्योपानयत् पुरम्॥ ३९

codito bhāryayotpāṭya pārijātaṃ garutmati|

āropya sendrān vibudhān nirjityopānayat puram|| 39

अर्थ

वहाँसे लौटते समय सत्यभामाजीकी प्रेरणासे भगवान् श्रीकृष्णने कल्पवृक्ष उखाड़कर गरुड़पर रख लिया और देवराज इन्द्र तथा समस्त देवताओंको जीतकर उसे द्वारकामें ले आये॥ ३९॥

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