श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.60.12

दशम स्कन्ध · अध्याय 60 · अथ षष्टितमोऽध्यायः

राजभ्यो बिभ्यतः सुभ्रूः समुद्रं शरणं गतान्।

बलवद्भिः कृतद्वेषान् प्रायस्त्यक्तनृपासनान्॥ १२

rājabhyo bibhyataḥ subhrūḥ samudraṃ śaraṇaṃ gatān|

balavadbhiḥ kṛtadveṣān prāyastyaktanṛpāsanān|| 12

अर्थ

सुन्दरी! देखो, हम जरासन्ध आदि राजाओंसे डरकर समुद्रकी शरणमें आ बसे हैं। बड़े-बड़े बलवानोंसे हमने वैर बाँध रखा है और प्रायः राजसिंहासनके अधिकारसे भी हम वंचित ही हैं॥ १२॥✎ 1438

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1438 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): विदर्भ-राजकुमारी! → विदर्भराजकुमारी!

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