॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.61.16
वृको हर्षोऽनिलो गृध्रो वर्धनोऽन्नाद एव च।
महाशः पावनो वह्निर्मित्रविन्दात्मजाः क्षुधिः॥ १६
vṛko harṣo'nilo gṛdhro vardhano'nnāda eva ca|
mahāśaḥ pāvano vahnirmitravindātmajāḥ kṣudhiḥ|| 16
अर्थ
मित्रविन्दाके पुत्र थे—वृक, हर्ष, अनिल, गृध्र, वर्धन, अन्नाद, महाश, पावन, वह्नि और क्षुधि॥ १६॥