श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.61.24

दशम स्कन्ध · अध्याय 61 · अथैकषष्टितमोऽध्यायः

रुक्मिण्यास्तनयां राजन् कृतवर्मसुतो बली।

उपयेमे विशालाक्षीं कन्यां चारुमतीं किल॥ २४

rukmiṇyāstanayāṃ rājan kṛtavarmasuto balī|

upayeme viśālākṣīṃ kanyāṃ cārumatīṃ kila|| 24

अर्थ

परीक्षित्! दस पुत्रोंके अतिरिक्त रुक्मिणीजीके एक परम सुन्दरी बड़े-बड़े नेत्रोंवाली कन्या थी। उसका नाम था चारुमती। कृतवर्माके पुत्र बलीने उसके साथ विवाह किया॥ २४॥

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