जब विवाहोत्सव निर्विघ्न समाप्त हो गया, तब कलिंगनरेश आदि घमंडी नरपतियोंने रुक्मीसे कहा कि ‘तुम बलरामजीको पासोंके खेलमें जीत लो॥ २७॥
तस्मिन् निवृत्त उद्वाहे कालिंगप्रमुखा नृपाः।
दृप्तास्ते रुक्मिणं प्रोचुर्बलमक्षैर्विनिर्जय॥ २७
जब विवाहोत्सव निर्विघ्न समाप्त हो गया, तब कलिंगनरेश आदि घमंडी नरपतियोंने रुक्मीसे कहा कि ‘तुम बलरामजीको पासोंके खेलमें जीत लो॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.61.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 523) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/61/27/