श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.62.20

दशम स्कन्ध · अध्याय 62 · अथ द्विषष्टितमोऽध्यायः

मनुजेषु च सा वृष्णीन् शूरमानकदुन्दुभिम्।

व्यलिखद् रामकृष्णौ च प्रद्युम्‍नं वीक्ष्य लज्जिता॥ २०

manujeṣu ca sā vṛṣṇīn śūramānakadundubhim|

vyalikhad rāmakṛṣṇau ca pradyumnaṃ vīkṣya lajjitā|| 20

अर्थ

मनुष्योंमें उसने वृष्णिवंशी वसुदेवजीके पिता शूर, स्वयं वसुदेवजी, बलरामजी और भगवान् श्रीकृष्ण आदिके चित्र बनाये। प्रद्युम्‍नका चित्र देखते ही ऊषा लज्जित हो गयी॥ २०॥

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