वहाँ अनिरुद्धजी बहुत ही सुन्दर पलँगपर सो रहे थे। चित्रलेखा योगसिद्धिके प्रभावसे उन्हें उठाकर शोणितपुर ले आयी और अपनी सखी ऊषाको उसके प्रियतमका दर्शन करा दिया॥ २३॥✎ 1697
तत्र सुप्तं सुपर्यंके प्राद्युम्निं योगमास्थिता।
गृहीत्वा शोणितपुरं सख्यै प्रियमदर्शयत्॥ २३
वहाँ अनिरुद्धजी बहुत ही सुन्दर पलँगपर सो रहे थे। चित्रलेखा योगसिद्धिके प्रभावसे उन्हें उठाकर शोणितपुर ले आयी और अपनी सखी ऊषाको उसके प्रियतमका दर्शन करा दिया॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.62.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 528) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/62/23/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)