श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.62.7

दशम स्कन्ध · अध्याय 62 · अथ द्विषष्टितमोऽध्यायः

नमस्ये त्वां महादेव लोकानां गुरुमीश्‍वरम्।

पुंसामपूर्णकामानां कामपूरामराङ्‌घ्रिपम्॥ ७

namasye tvāṃ mahādeva lokānāṃ gurumīśvaram|

puṃsāmapūrṇakāmānāṃ kāmapūrāmarāṅghripam|| 7

अर्थ

‘देवाधिदेव! आप समस्त चराचर जगत‍्के गुरु और ईश्‍वर हैं। मैं आपको नमस्कार करता हूँ। जिन लोगोंके मनोरथ अबतक पूरे नहीं हुए हैं, उनको पूर्ण करनेके लिये आप कल्पवृक्ष हैं॥ ७॥

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