आदिदेव! एक बार मेरी बाहोंमें लड़नेके लिये इतनी खुजलाहट हुई कि मैं दिग्गजोंकी ओर चला। परन्तु वे भी डरके मारे भाग खड़े हुए। उस समय मार्गमें अपनी बाहोंकी चोटसे मैंने बहुतसे पहाड़ोंको तोड़-फोड़ डाला था’॥ ९॥
कण्डूत्या निभृतैर्दोर्भिर्युयुत्सुर्दिग्गजानहम्।
आद्यायां चूर्णयन्नद्रीन् भीतास्तेऽपि प्रदुद्रुवुः॥ ९
आदिदेव! एक बार मेरी बाहोंमें लड़नेके लिये इतनी खुजलाहट हुई कि मैं दिग्गजोंकी ओर चला। परन्तु वे भी डरके मारे भाग खड़े हुए। उस समय मार्गमें अपनी बाहोंकी चोटसे मैंने बहुतसे पहाड़ोंको तोड़-फोड़ डाला था’॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.62.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 526) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/62/9/