श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.63.3

दशम स्कन्ध · अध्याय 63 · अथ त्रिषष्टितमोऽध्यायः

प्रद्युम्‍नो युयुधानश्‍च गदः साम्बोऽथ सारणः।

नन्दोपनन्दभद्राद्या रामकृष्णानुवर्तिनः॥ ३

pradyumno yuyudhānaśca gadaḥ sāmbo'tha sāraṇaḥ|

nandopanandabhadrādyā rāmakṛṣṇānuvartinaḥ|| 3

अर्थ

अब श्रीकृष्ण और बलरामजीके साथ उनके अनुयायी सभी यदुवंशी—प्रद्युम्‍न, सात्यकि, गद, साम्ब, सारण, नन्द, उपनन्द और भद्र आदिने बारह अक्षौहिणी सेनाके साथ व्यूह बनाकर चारों ओरसे बाणासुरकी राजधानीको घेर लिया॥ ३-४॥

यह अर्थ श्लोक 3–4 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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