श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.63.43

दशम स्कन्ध · अध्याय 63 · अथ त्रिषष्टितमोऽध्यायः

अहं ब्रह्माथ विबुधा मुनयश्‍चामलाशयाः।

सर्वात्मना प्रपन्‍नास्त्वामात्मानं प्रेष्ठमीश्‍वरम्॥ ४३

ahaṃ brahmātha vibudhā munayaścāmalāśayāḥ|

sarvātmanā prapannāstvāmātmānaṃ preṣṭhamīśvaram|| 43

अर्थ

मैं, ब्रह्मा, सारे देवता और विशुद्ध हृदयवाले ऋषि-मुनि सब प्रकारसे और सर्वात्मभावसे आपके शरणागत हैं; क्योंकि आप ही हमलोगोंके आत्मा, प्रियतम और ईश्‍वर हैं॥ ४३॥

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