॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.63.43
अहं ब्रह्माथ विबुधा मुनयश्चामलाशयाः।
सर्वात्मना प्रपन्नास्त्वामात्मानं प्रेष्ठमीश्वरम्॥ ४३
ahaṃ brahmātha vibudhā munayaścāmalāśayāḥ|
sarvātmanā prapannāstvāmātmānaṃ preṣṭhamīśvaram|| 43
अर्थ
मैं, ब्रह्मा, सारे देवता और विशुद्ध हृदयवाले ऋषि-मुनि सब प्रकारसे और सर्वात्मभावसे आपके शरणागत हैं; क्योंकि आप ही हमलोगोंके आत्मा, प्रियतम और ईश्वर हैं॥ ४३॥