॥ श्रीहरिः ॥
एतस्मिन्नन्तरे याम्यैर्दूतैर्नीतो यमक्षयम्।
यमेन पृष्टस्तत्राहं देवदेव जगत्पते॥ २२
etasminnantare yāmyairdūtairnīto yamakṣayam|
yamena pṛṣṭastatrāhaṃ devadeva jagatpate|| 22
अर्थ
देवाधिदेव जगदीश्वर! इसके बाद आयु समाप्त होनेपर यमराजके दूत आये और मुझे यमपुरी ले गये। वहाँ यमराजने मुझसे पूछा—॥ २२॥
एतस्मिन्नन्तरे याम्यैर्दूतैर्नीतो यमक्षयम्।
यमेन पृष्टस्तत्राहं देवदेव जगत्पते॥ २२
देवाधिदेव जगदीश्वर! इसके बाद आयु समाप्त होनेपर यमराजके दूत आये और मुझे यमपुरी ले गये। वहाँ यमराजने मुझसे पूछा—॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.64.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 539) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/64/22/