श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.65.14

दशम स्कन्ध · अध्याय 65 · अथ पञ्चषष्टितमोऽध्यायः

किं नस्तत्कथया गोप्यः कथाः कथयतापराः।

यात्यस्माभिर्विना कालो यदि तस्य तथैव नः॥ १४

kiṃ nastatkathayā gopyaḥ kathāḥ kathayatāparāḥ|

yātyasmābhirvinā kālo yadi tasya tathaiva naḥ|| 14

अर्थ

तीसरी गोपीने कहा—‘अरी गोपियो! हमलोगोंको उसकी बातसे क्या मतलब है? यदि समय ही काटना है तो कोई दूसरी बात करो। यदि उस निष्ठुरका समय हमारे बिना बीत जाता है तो हमारा भी उसीकी तरह, भले ही दुःखसे क्यों न हो, कट ही जायगा’॥ १४॥

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