यह कहकर कि ‘बलरामजी! तुम जगदीश्वर हो, अपने छोटे भाई श्रीकृष्णके साथ सर्वदा हमारी रक्षा करते रहो, उनको गोदमें ले लिया और अपने प्रेमाश्रुओंसे उन्हें भिगो दिया॥ ३॥✎ 1699
चिरं नः पाहि दाशार्ह सानुजो जगदीश्वरः।
इत्यारोप्यांकमालिङ्ग्य नेत्रैः सिषिचतुर्जलैः॥ ३
यह कहकर कि ‘बलरामजी! तुम जगदीश्वर हो, अपने छोटे भाई श्रीकृष्णके साथ सर्वदा हमारी रक्षा करते रहो, उनको गोदमें ले लिया और अपने प्रेमाश्रुओंसे उन्हें भिगो दिया॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.65.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 542) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/65/3/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)