श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.65.5

दशम स्कन्ध · अध्याय 65 · अथ पञ्चषष्टितमोऽध्यायः

समुपेत्याथ गोपालान् हास्यहस्तग्रहादिभिः।

विश्रान्तं सुखमासीनं पप्रच्छुः पर्युपागताः॥ ५

samupetyātha gopālān hāsyahastagrahādibhiḥ|

viśrāntaṃ sukhamāsīnaṃ papracchuḥ paryupāgatāḥ|| 5

अर्थ

ग्वालबालोंके पास जाकर किसीसे हाथ मिलाया, किसीसे मीठी-मीठी बातें कीं, किसीको खूब हँस-हँसकर गले लगाया। इसके बाद जब बलरामजीकी थकावट दूर हो गयी, वे आरामसे बैठ गये, तब सब ग्वाल उनके पास आये। इन ग्वालोंने कमलनयन भगवान् श्रीकृष्णके लिये समस्त भोग, स्वर्ग और मोक्षतक त्याग रखा था। बलरामजीने जब उनके और उनके घरवालोंके सम्बन्धमें कुशलप्रश्‍न किया, तब उन्होंने प्रेम-गद्गद वाणीसे उनसे प्रश्‍न किया॥ ५-६॥✎ 1699

यह अर्थ श्लोक 5–6 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1699 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: आप-लोगोंको → आपलोगोंको

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