श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.65.7

दशम स्कन्ध · अध्याय 65 · अथ पञ्चषष्टितमोऽध्यायः

कच्चिन्‍नो बान्धवा राम सर्वे कुशलमासते।

कच्चित् स्मरथ नो राम यूयं दारसुतान्विताः॥ ७

kaccinno bāndhavā rāma sarve kuśalamāsate|

kaccit smaratha no rāma yūyaṃ dārasutānvitāḥ|| 7

अर्थ

‘बलरामजी! वसुदेवजी आदि हमारे सब भाई-बन्धु सकुशल हैं न? अब आपलोग स्त्री-पुत्र आदिके साथ रहते हैं, बाल-बच्चेदार हो गये हैं; क्या कभी आपलोगोंको हमारी याद भी आती है?॥ ७॥✎ 1699

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1699 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: आप-लोगोंको → आपलोगोंको

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