‘बलरामजी! वसुदेवजी आदि हमारे सब भाई-बन्धु सकुशल हैं न? अब आपलोग स्त्री-पुत्र आदिके साथ रहते हैं, बाल-बच्चेदार हो गये हैं; क्या कभी आपलोगोंको हमारी याद भी आती है?॥ ७॥✎ 1699
कच्चिन्नो बान्धवा राम सर्वे कुशलमासते।
कच्चित् स्मरथ नो राम यूयं दारसुतान्विताः॥ ७
‘बलरामजी! वसुदेवजी आदि हमारे सब भाई-बन्धु सकुशल हैं न? अब आपलोग स्त्री-पुत्र आदिके साथ रहते हैं, बाल-बच्चेदार हो गये हैं; क्या कभी आपलोगोंको हमारी याद भी आती है?॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.65.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 542) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/65/7/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)